जय श्री राधेकृष्ण
आज बात करेंगे चन्द्र,मंगल की युति के बारेमे
चन्द्रमा कोमल। माता। मन। रोमांस। जल आदि। मंगल अग्नि। आक्रामकता। पराक्रम।फ़ोर्स गर्म कहीं। मंगल तो जिस भी ग्रह के साथ बैठेगा उसको फ़ोर्स करेगा कुछ करने के लिए। गुरु के साथ बैठेगा तो ज्ञान ग्रहण करने के लिए पीछे पड़ जायेगा। इसी तरह चन्द्रमा यानी मन को भी कहा चैन से बैठने देगा। कभी बोलेगा ये कर। कभी बोलेगा वो कर। इसी करने के चक्कर मे कुछ उल्टा सीधा न करवा दी।
इस योग को महा लक्ष्मी योग भी बोलते है। शास्रो में भी लिखा है कि इसयोग वाले जातक के घर से लक्ष्मी कभी नही जाती।
ये योग के लिए कहते है कि जातक या जातिका के अफेयर भी रहते है। वो तो होंगे ही मंगल कहा चन्द्रमा यानी मन या रोमांस को चैन से बैठने देगा । पापी ग्रह भी है। चन्द्रमा तो बेचारा जल जाए जहा रास्ता बनाया वही से गुजर लिया। अग्नि के ताप को कब तक सहन करेगा। भाप बन कें उड़ जाएगा। अब देखना ये है कि किसकी मात्रा ज्यादा है मतलब कौन ज्यादा बलि है। मतलब जल की मात्रा ज्यादा है या अग्नि की। ये सब निर्भर तो बलाबल पे ही करेगा न। कर्क राशि मे चन्द्र स्वग्रही हो जाएगा। मंगल नीच का तो सेनापति कमजोर हो जाएगा।
इस योग वाले जातक को अक्कड़। हठ। जिद्दी। मंगल तो बोल ही देगा न कि देख मन तेरे साथ ये हो रहा है। उसने तेरे को ये बोला। ये किया तेरे साथ। ए मन चुप मत बैठ दिल पे ले बात को। क्रिया की प्रतिक्रिया कर। जिद्दी बनजा। मंगल तो खुद क्रिया है। मंगल खुद एक सेनापति है। क्या वो चन्दर को चैन से बैठने देगा। जिद्दी बना देगा। हठी बना देगा।
ऐसे जातकों के पेट मे कोई बात पचेगी भी नही। छोटी से छोटी बात का ढिंढोरा गाव में पिट देंगे। आल इंडिया रेडियो। इसी से सारा काम खराब हो जाता है। क्योंकि कोई भी बात होने से पहले सब जगह बोल दी जाए तो उसका प्रभाव कम हो जाता है। जातक में संयम की कमी रहे। मन अशांत रहे।
दोनो में से एक अशुभ भाव का स्वामी या अशुभ नवांश नक्षत्र में में हुआ तो कष्ट ही कष्ट।
क्योंकि गुस्से में आकर जातक कुछ भी कर गुजरे।
लेकिन शुभ योग हुआ। चन्द्रमा बलि हुआ तो जातक धर्म के मार्ग ओर जाने की ठान ले तो *कल्याण* तय है।
ज्योतिषाचार्य कीर्ति गुप्ता
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